हम सभी जानते हैं कि आदिकवि वाल्मीकि की रामायण ही राम कथा का आदि स्रोत है। महर्षि वाल्मीकि की प्रतिभा से प्रसूत रामायण ने जनमानस को इतना प्रभावित किया कि उस से प्रेरणा लेकर परवर्ती संस्कृत कवियों ने रामकथा के आधार पर विविध साहित्य का सृजन किया।
उनमें कालिदास का ' रघुवंश ' ,
भवभूति का ' उत्तर रामचरित ' ,
जयदेव का ' प्रसन्नराघवम '
कुमार दास का ' जानकी हरण ' एवं
क्षेमेंद्र का ' रामायण मंजरी ' उल्लेखनीय है ।
अनेक पुराणों यथा - ब्रह्म पुराण, पद्म पुराण, विष्णु पुराण , अग्नि पुराण, कूर्म पुराण आदि में भी रामकथा का सम्मानपूर्वक उल्लेख किया गया है।
श्रीराम पर उपनिषद भी मिलते हैं -
1. श्रीरामपूर्वतापनीयोपनिषद एवं
2. श्रीरामोत्तरतापनीयोपनिषद।
भारत में ऐसी कोई भाषा नहीं , जिसने प्रभु " श्री राम " के गान से अपने को पवित्र न किया हो । अब तक सभी प्रादेशिक भाषाओं में रामकथा पर सैकड़ों पुस्तकें लिखी जा चुकी हैं।
भारतीय भाषाओं में श्री राम कथा पर उपलब्ध कृति की एक झलक प्रस्तुत की जा रही है : -
तमिल में महाकवि कम्बन का " कम्ब रामायण " ,
तेलुगु में गोन गन्नारेड्डी का " रंगनाथ रामायण " ,
मलयालम में एजुतचन का " अध्यात्म रामायण " ,
कन्नड़ में कुमुदेन्दु का " कुमुदेन्दु रामायण " ,
मराठी में संत एकनाथ का " भावार्थ रामायण " ,
गुजराती में गिरधर दास का " गुजराती रामायण ",
उड़िया में बलराम दास का " जगमोहन रामायण ",
बंगला में कृतिबास ओझा का " रामायण पंंचाली ",
असमिया में माधव कंजली का " असमी रामायण " ,
कश्मीरी में दिवाकर भट्ट का " कश्मीरी रामायण ",
पंजाबी में गुरु गोविंद सिंह का " रामावतार ",
नेपाली में कवि भानुभक्त का " संपूर्ण रामायण ",
मैथिली में चंदा झा का " मैथिली रामायण ",
फारसी में शेख साद मसीह का "दास्तान ए राम व सीता ",
सिंहली में कुमार दास का " जानकी हरण ",
उर्दू में बाबू सिंह बालियान का " रघुवंशी उर्दू रामायण " ,
हिंदी में मैथिलीशरण गुप्त का " साकेत " एवं
हिंदी में फादर कामिल बुल्के का " राम कथा - उद्भव और विकास " काफी महत्वपूर्ण है।
महाकवि भक्त तुलसीदास जी का श्री रामचरितमानस तो जन-जन के हृदय में बसा हुआ है।
भारत के प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी के शब्दों में
" अलग-अलग रामकथा में अलग-अलग स्थानों पर राम भिन्न-भिन्न रूप में मिलेंगे, लेकिन प्रभु श्री राम सब जगह हैं और प्रभु राम सबके हैं, इसलिए श्रीराम भारत की विविधता में एकता के सूत्र हैं। भारत की ऐसी कोई भावना नहीं है, जिसमें प्रभु राम झलकते न हों। भारत की आस्था में राम हैं, भारत के आदर्श में राम हैं, भारत की दिव्यता में राम हैं एवं भारत के दर्शन में राम हैं। "
।। श्री राम जय राम जय जय राम ।।"
श्रीराम जन्मभूमि की जय 🏹 🚩
श्री अयोध्या धाम की जय 🏹 🚩
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