" रामायण "



रामायण का अर्थ हैं, श्रीराम जी का " अयन " और अयन का अर्थ हैं, " यात्रा पथ " 

इस तरह रामायण का अर्थ हुआ, "राम ( श्रीराम जी) का यात्रा पथ "
 
 " श्रीरामचरितमानस " का शाब्दिक अर्थ हैं,  
" श्रीराम का (सद्गुणो से भरा) चरित्र " 

श्री तुलसीदास जी ने रामचरितमानस के बालकांड के 35 वें चरण की छठी चौपाई में बताया है कि, इस अलौकिक गंन्थ का नाम श्रीरामचरितमानस क्यों हैं?

श्री तुलसीदास जी बालकांड के 36 वें चरण की पहली चौपाई में बड़े ही विनम्र भाव से कहते है, कि...

तुलसीदास के हृदय मे श्री शिव जी की कृपा से सुन्दर बुद्धि का विकास हुआ इसलिए " श्रीरामचरितमानस " के कवि तुलसीदास हुए। 

इस तरह रामचरितमानस लिखने का सारा श्रेय श्री तुलसीदास जी भगवान शिव जी को देते हैं। 
 " संभु प्रसाद सुमति हियँ हुलसी रामचरितमानस कवि तुलसी " 
हुलसी का अर्थ हैं , हुलास, आनंद। 
   
रचि महेस निज मानस राखा। पाइ सुसमउ सिवा सन भाषा॥
तातें रामचरितमानस बर। धरेउ नाम हियँ हेरि हरषि हर॥

भावार्थ-
महादेव ने इसको रचकर अपने मन में रखा था और सुअवसर पाकर पार्वती से कहा। इसी से शिव ने इसको अपने हृदय में देखकर और प्रसन्न होकर इसका सुंदर 'रामचरितमानस' नाम रखा।       
  
सियावर रामचन्द्र की जय 🚩
पवनसुत हनुमान की जय 🚩

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