" ज्ञानगंज का रहस्य "


( ज्ञानगंज, सिद्धाश्रम, शांग्रीला घाटी, शम्भाला )

स्वामी विशुद्धानंद परमहंस ने सबसे पहले सार्वजनिक रूप से इस स्थान की बात की थी। उन्हें बचपन में कुछ समय के लिए वहाँ ले जाया गया और उन्होंने लंबे समय तक ज्ञानगंज आश्रम में अपनी साधना की।

परम्परा के अनुसार ऐसा विश्वास किया जाता है कि हिमालय पर्वत में "ज्ञानगंज" नामक एक आश्रम है जहाँ सिद्ध योगी और साधु रहते हैं। 

इस अलौकिक आश्रम का उल्लेख चारों वेदों के अलावा अनेकों प्राचीन ग्रन्थों में मिलता है। इसका उल्लेख कई भारतीय महाकाव्यों, वेदों, उपनिषदों और पुराणों में किया गया है जिनमें ऋग्वेद, मानव सभ्यता का सबसे पुराना ग्रंथ है।

इसके एक ओर कैलाश मानसरोवर है, दूसरी ओर ब्रह्म सरोवर है और तीसरी ओर विष्णु तीर्थ है। स्वयं विश्वकर्मा ने ब्रह्मादि के कहने पर इस आश्रम की रचना की। 

हिंदू धर्म में कई लोग मानते हैं कि महर्षि वशिष्ठ, विश्वामित्र, कणाद, पुलस्त्य, अत्रि, महायोगी गोरखनाथ, श्रीमद शंकराचार्य, भीष्म, कृपाचार्य को भौतिक रूप में वहाँ भ्रमण करते देखा जा सकता है और किसी को भी उनके उपदेश सुनने का सौभाग्य प्राप्त हो सकता है। 

इसी प्रकार यह भी माना जाता है कि इस ब्रह्मांड में अपने दिव्य कार्यों का निर्वहन करते हुए आध्यात्मिक रूप से सशक्त योगी "ज्ञानगंज" के संपर्क में रहते हैं और वे नियमित रूप से यहां आते हैं।

कई सिद्ध योगी, योगिनियां, अप्सरा (एंजल), संत इस स्थान पर ध्यान करते पाए जाते हैं। बगीचे में सुंदर फूल, पेड़, पक्षी, सिद्ध-योग झील, ध्यान करने वाले संत और जगह की कई अन्य चीजों को शब्दों में वर्णित नहीं किया जा सकता है।

यद्यपि कोई भी साधु, संन्यासी, यति, भिक्षु और योगी किसी भी नाम से 'ज्ञानगंज' को जानते होंगे या विभिन्न पंथों ने अपनी मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग पूजा या साधना विधियों का उपयोग किया होगा।
 
एक अन्य परंपरा के अनुसार, "ज्ञानगंज" तिब्बती क्षेत्र में कैलाश पर्वत के पास स्थित है। तिब्बती लोग इसे ही शम्भाला की रहस्यमय भूमि के रूप में पूजते हैं। एक अन्य परम्परा के अनुसार "ज्ञानगंज" तिब्बत क्षेत्र में कैलाश पर्वत के निकट स्थित है।

"ज्ञानगंज" को आध्यात्मिक चेतना, दिव्यता के केंद्र और महान ऋषियों की वैराग्य भूमि का आधार माना जाता है। "ज्ञानगंज" मानव और सभी दृश्य और अदृश्य प्राणियों के लिए समान रूप से दुर्लभ है। 

इस प्रकार, "ज्ञानगंज" को एक बहुत ही दुर्लभ दिव्य स्थान माना जाता है। लेकिन साधना प्रक्रिया के माध्यम से कठिन साधना और साधना पथ पर चलकर इस दुर्लभ और पवित्र स्थान में प्रवेश करने के लिए दिव्य शक्ति प्राप्त करना संभव होगा।

"ज्ञानगंज" प्रबुद्ध लोगों या सिद्धों के लिए समाज है। जो व्यक्ति साधना में उच्च स्तर तक पहुँचता है, वह गुरु के आशीर्वाद से रहस्यमयी सिद्धाश्रम पहुँच सकता है, जो इस स्थान का नियमित स्वामी है।

विभिन्न धर्मों में वर्णित कई रहस्यमय स्थानों की तरह इस जगह को नग्न आंखों से नहीं देखा जा सकता है, यह एक अनुभव है और केवल ध्यान और आध्यात्मिक जागरूकता के मार्ग से हम इस स्थान का अनुभव कर सकते हैं। 

हिमालय की गोद में बसी घाटी "ज्ञानगंज" से जुड़े ऐसे अनसुलझे रहस्य जिन्हें आज तक कोई वैज्ञानिक भी नही सुलझा पाया

क्या आपने कभी अमर दुनिया की कल्पनाओं के बारे में सुना है? क्या आपने कभी सोचा है कि इंसान के सदा अमर होने की कोई संभावना है?

ऐसा माना जाता है कि यह जगह किसी सिद्ध शक्ति के नियंत्रण में है और उनकी ईच्छा के बिना वहां से पत्ता भी नही हिलता है| कोई भी वहाँ न तो जा सकता है और ना ही वहाँ से वापस आ सकता है|वंहा वे ही लोग जाने में सफल हो पाते है जिनकी चेतना का स्तर उच्च हो|

इस जगह के बारे में ऐसा भी कहा जाता है कि यहाँ कोई मृत्यु नहीं होती। यहां रहने वाले संन्यासियों की उम्र रुक जाती है। इस मठ में समय को रोकने वाले महात्मा तपस्या लीन रहते हैं। आश्चर्य की बात है कि ये सैटेलाइट में भी नहीं दिखती। ये जगह किसी खास धर्म या कल्चर की नहीं है। न ही ईस्ट या वेस्ट से जुड़ी है।

लेखक जेम्स हिल्टन की किताब ‘Lost Horizon, about the lost kingdom of Shangri-La’ में भी इस जगह का जिक्र हुआ है।कहा जाता है कि जो भी इस जगह के लायक होता है, वह इसे ढूंढ सकता है। 

1942 में एक अंग्रेज अफसर LP फरैल को इस जगह पर कुछ खास अनुभव हुए थे, जिसके बारे में उन्होंने 1959 में साप्ताहिक हिंदुस्तान में लेख प्रकाशित करवाए थे। तिब्बती बुद्धिस्ट्स का मानना है कि जब दुनिया में युद्ध होगा, शंभाला का 25वां शासक इस धरती को बचाने आएगा। 

इस घाटी के बारे में आप को अधिक जानकारी एक प्राचीन ग्रन्थ ‘काल विज्ञान’ जो की तिब्बत के तवांग मठ के एक पुस्तकालय में आज भी मौजूद है में मिल सकती है| 

इस किताब में वर्णन है की हम जिस संसार में रहते है वह तीन आयामी संसार है जहां हर वस्तू देश, समय, और नियती से बंधी हुई है| जब व्यक्ति ऐसे क्षेत्रो में प्रवेश कर जाता है जहां समय नगण्य है, तब वह समय के बन्धनों से परे चला जाता है. सरल शब्दों में हमारे यंहा के सेकड़ो वर्ष और वहां का एक पल बराबर होंगे| यानि कोई व्यक्ति ऐसे स्थानों पर यदि कुछ वर्ष बिता कर वापस आता है तो संभव है की उसके वापस आने तक हमारे संसार की सदियों गुजर चुकी हो. शंगरीला घाटी पर विचार, मन, और प्राण की शक्ति बहूत ही उच्च स्तर तक पहुँच जाती है|

जो लोग इस घाटी से परिचित है वो बताते है कि आज भी वहाँ ऐसे योगी और सिद्ध पुरुष मौजूद है जिनकी उम्र हजारो वर्ष है| एवं वे अपने दृश्य या अदृश्य रूप में यहां निवास करते है.

उनका दावा है कि प्रसिद्ध योगी श्यामाचरण लाहिड़ी के गुरु जिन्होंने शंकराचार्य को भी दीक्षा दी थी वे आज भी इन घाटियों (ज्ञानगंज, Gyanganj) के आश्रमों में निवास कर रहे है एवं समय समय पर आकाश मार्ग से आकर अपने शिष्यों को निर्देश भी देते है|

अनेको सैनिको, खोजकर्ताओ, पर्वतारोहियों, वैज्ञानिको आदि ने समय समय पर इस स्थान के बारे में अपने रोमांचकारी अनुभवों का विस्तार से वर्णन किया है| कई तरह के किस्से कहानियाँ भी इस जगह को लेकर प्रचलित है| लेकिन कभी भी यहाँ के रहस्यों को पूरी तरह से समझा नहीं जा सका है।

◆उपरोक्त चित्र◆
आप कल्पना भी नहीं कर सकते इन रहस्य के विषय में वैज्ञानिक भी इन रहस्य को सुलझा नहीं पाए हैं। 

एक समय तो ऐसा भी आया था जब कुछ रिसर्च ने मिलकर इस क्षेत्र में गूगल मैप के जरिए बहुत ही विकसित शहर को ढूंढ निकाला था। 

यह घटना 2004 की थी लेकिन बाद में गूगल ने इस पूरे क्षेत्र को काले धब्बे के रूप में दिखाना शुरू कर दिया।
 
ये चित्र लेंने के बाद ही इस स्थान को पुन: देखने पर सैटलाईट चित्र में काला धब्बा दिखाई देने लगा था इस स्थान पर ! 

किंतु गूगल का कोई भी प्रतिनिधि कभी भी ज्ञानगंज तक पहुंच ही नहीं पाया है।

जय वैदिक सनातन धर्मस्य 🔱 🏹 🪈 🚩

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