भोजशाला,धार (म.प्र.)



आओ जाने भोजशाला और वाग्वदेवी को....!!!!

महाराजा भोज माँ सरस्वती के वरदपुत्र थे ...

जहा पर माँ सरस्वती की कृपा से महराजा भोज ने 64 प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त की....

वह स्थान भोजशाला है...........

महाराजा भोज ने माँ सरस्वती के जिस दिव्य स्वरूप के साक्षात् दर्शन किये थे उसी स्वरूप को महान मूर्तिकार मंथल ने निर्माण किया.... 

भूरे रंग के स्फटिक से निर्मित यह प्रतिमा अत्यंत ही चमत्कारिक, मनोमोहक एव शांत मुद्रा वाली है, जिसमें माँ का अपूर्व सोंदर्य चित्ताकर्षक है \ध्यानस्थ अवस्था में वाग्देवी कि यह प्रतिमा विश्व की सबसे सुन्दर कलाकृतियों में से एक मानी जाती है.....

जहा देश विदेश के लाखो विद्यार्थियों ने 1400 प्रकांड विद्वान आचार्यो के सानिध्य आलोकिक ज्ञान प्राप्त किया ..... 

इन आचार्यो में भवभूती, माघ, बाणभट्ट, कालिदास, मानतुंग, भास्करभट्ट, धनपाल, बोद्ध संत बन्स्वाल, समुन्द्र घोष आदि विश्व विख्यात है......

महाराजा भोज के पश्चात अध्यन अध्यापन का कार्य 200 वर्षो तक निरंतर जारी रहा...... माँ सरस्वती का यह भव्य मंदिर पूर्व कि और मुख किये हुए बहुमंजिला आयताकर भवन है ..... जो अपने वास्तु शिल्प के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है !

माँ के प्रगट्य स्थल पर सेकड़ो वर्षो से अविरत आराधना, यज्ञ, हवन, पूजन एवं तपस्वियों कि साधना से भोजशाला सम्पूर्ण विश्व में सिद्ध पीठ के रूप में आस्था और श्रद्धा का केंद्र है। 

1269 इसवी से ही इस्लामी आक्रंताओ ने अलग अलग तरीको से योजना पूर्वक भारत वर्ष के इस अध्यात्मिक और सांस्कृतिक मान बिंदु भोजशाला पर आक्रमण किया जिसे तत्कालीन हिन्दू राजाओ ने विफल कर दिया।

सन 1305 मे इस्लामी आक्रान्ता अलाउद्दीन खिलजी ने भोजशाला पर आक्रमण कर माँ वाग्देवी की प्रतिमा को खंडित कर दिया तथा ......

उसने भोजशाला को के कुछ भाग को ध्वस्त किया।आचार्यो की हत्या कर यज्ञ कुंण्ड में डाल दिया ......

राजा मेदनीराय ने वनवासी धर्मयोधाओ को साथ ले कर मुस्लिम आक्रान्ताऔ को मार भगाया गया। 

तत्पश्चात 1902 में से वाग्देवी की प्रतिमा को मेजर किनकैड अपने साथ इंग्लेंड ले गया, जो, आज भी लन्दन संग्रहालय में कैद है।

या कुंदेंदु तुषार हार धवला या शुभ्र वस्त्रावृता।
या वीणा वर दण्ड मंडित करा या श्वेत पद्मासना।
या ब्रह्माच्युत्त शंकर: प्रभृतिर्भि देवै सदा वन्दिता।
सा माम पातु सरस्वती भगवती नि:शेष जाड्या पहा।

जय वैदिक सनातन धर्मस्य 🔱🏹🪈🚩

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