औरंगजेब
मै यहाँ कुछ भी गलत या हिंसक बात नही कह रहा हूँ बस हमारे इतिहास के आधे सच मे आधे झूठ को मिलाकर किस तरह एक क्रूर शासक को दानवीर, नेक और एक महान इंसान घोषित कर दिया बस उसी तथ्य को कुछ ऐतिहासिक प्रमाणों के साथ स्पष्ट कर रहा हूँ उम्मीद करता हूँ कि आप पूरा पढ़ेंगे।
जैसा कि आप सब जानते है कि औरंगज़ेब का जन्म गुजरात के दाहोद गांव मे 3 नवंबर 1618 को हुआ था ये मुगल सम्राट शाहजहाँ और मुमताज महल के तीसरे पुत्र और छठी संतान थे जिसे आमतौर पर औरंगजेब या आलमगीर के नाम से जाना जाता था भारत पर राज्य करने वाला छठा मुगल शासक था उसका शासन 1647 - 1707 मे उसकी मृत्यु होने तक चला। औरंगजेब ने भारतीय
उपमहाद्वीप पर आधी सदी से भी ज्यादा समय तक राज्य किया उसके शासनकाल मे मुगल साम्राज्य अपने चरमोत्कर्ष पर था जिसकी वजह से वह अपने समय का सबसे धनी व शक्तिशाली व्यक्ति था उसने पूरे साम्राज्य पर फतवा -ए- आलमगीरी ( शरीयत या इस्लामी कानून ) लागू किए।
हिंदुओं पर शरीयत लागू करने वाला वो पहला मुसलमान शासक था और कुरान को अपना शासन आधार मानते हुए सिक्को पर कलमा खुदवाना, नौरोज का त्योहार मनाना, भांग की खेती करना,गाना- बजाना, आदि पर रोक लगा दी।
इसके साथ ही सतीप्रथा पर प्रतिबंध लगाया,तीर्थ कर पुन: लगाया, झरोखा दर्शन और तुलादान पर रोक लगाया 1668 मे हिंदु त्योहारों पर प्रतिबंध लगा दिया और उसने कई मंदिरो को तोड़ने का आदेश दिया जिसके तहत मथुरा का केशव राय मंदिर और बनारस विश्वनाथ मंदिर, सोमनाथ मंदिर के साथ अकेले उदयपुर मे 172 और चित्तौड़ मे 63 मंदिरों को तुड़वाकर मस्जिद बनवाई और मंदिरों की मूर्तियो को मस्जिदों के चौतरो पर दवा दिया।
औरंगजेब का महत्त्वपूर्ण लक्ष्य 'दारूल हर्ब'। यानी काफिरो के देश भारत को 'दारूल इस्लाम' यानी इस्लाम के देश मे परिवर्तित करना था।
हिन्दुओं पर तीर्थ यात्रा पर जजिया कर लगा दिया, यहाँ तक की साधु-फकीरों तक को नहीं छोड़ा।
औरंगज़ेब ने होली पर प्रतिबन्ध लगाकर, मंदिरों में गोहत्या करवाकर, अनेक मंदिरों को तुड़वा कर अपने आपको "आलमगीर" बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
औरंगजेब द्वारा हिन्दू मंदिरों को तोड़ने के लिए जारी किये गए फरमानों का कच्चा चिट्ठा
1- काशी विश्वनाथ मंदिर
9 अप्रैल 1669 को मिर्जा राजा जय सिंह अम्बेर की मौत के बाद औरंगजेब के हुक्म से उसके पूरे राज्य में जितने भी हिन्दू मंदिर थे, उनको तोड़ने का हुक्म दे दिया गया और किसी भी प्रकार की हिन्दू पूजा पर पाबन्दी लगा दी गयी।
9 अप्रैल 1669 को मुग़ल सम्राट औरंगज़ेब के आदेशानुसार काशी विश्वनाथ (बनारस) अगस्त 1669 का विध्वंस किया गया था
मूल काशी विश्वनाथ मंदिर, वाराणसी को नष्ट करने के बाद ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण औरंगजेब ने 1669 ईस्वी में किया।
हिंदू मंदिर के अवशेषों को ज्ञानवापी मस्जिद की दीवारों पर देखा जा सकता है
मस्जिद के निर्माण से पहले जो मंदिर का ढांचा मौजूद था, वह शायद अकबर के शासनकाल में राजा मान सिंह द्वारा बनाया गया था।
2- सोमनाथ मंदिर
भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में सर्वप्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में माना व जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इसका निर्माण स्वयं चन्द्रदेव ने किया था, जिसका उल्लेख ऋग्वेद में स्पष्ट है।
9 अप्रैल, 1969 को मुगल बादशाह औरंगजेब द्वारा पारित आदेश के अनुसार 'सोमनाथ मंदिर' का भी विध्वंस किया गया
जिसके स्थान पर भी एक मस्जिद का निर्माण करवाया गया था
3- औंधा नागनाथ
औंधा नागनाथ 12 ज्योतिर्लिंगों में से 8 वें स्थान पर है, मंदिर का निर्माण 7 मंजिला था और इसे औरंगज़ेब द्वारा तोड़ दिया गया था।
औंधा नागनाथ के पहले मंदिर का निर्माण युधिष्ठिर ने महाभारत के समय में करवाया था। औंधा नागनाथ का वर्तमान मंदिर 13 वीं शताब्दी में सेउना / यादव वंश द्वारा बनाया गया है।
4- केशवदेव राय मंदिर मथुरा
मथुरा में स्थित केशवदेव राय का महान मंदिर भगवान श्री कृष्ण की जन्मभूमि और भारत में निर्मित सबसे शानदार मंदिरों में से एक था।
भगवान कृष्ण के प्रपौत्र वज्रनाभ ने लगभग 5,000 साल पहले यहां पहला बड़ा मंदिर बनवाया था। दूसरा बड़ा मंदिर 400ईसवी मे गुप्त साम्राज्य के चंद्रगुप्त द्वितीय के समय मे बनवाया गया था
विजयपाल देव के शासन के दौरान विक्रम संवत १२० 11 (११५० ईस्वी) में जाजा जी द्वारा निर्मित तीसरा मंदिर और चौथा मंदिर वीर सिंह जी द्वारा बनवाया गया था जिसके ऊपर ही औरंगजेब ने ईदगाह मस्जिद बनवाई थी ।
11 जनवरी -16 फरवरी 1670 औरंगजेब द्वारा मथुरा के भगवान केशवदेव राय मंदिर को तोड़ने का फरमान जारी किया गया
जिसके बाद केशव देव राय के मंदिर को तोड़ दिया गया और उसके स्थान पर मस्जिद बना दी गयी। मंदिर की मूर्तियों को तोड़ कर आगरा लेकर जाया गया और उन्हें मस्जिद की सीढियों में गाड़ दिया गया और मथुरा का नाम बदल कर इस्लामाबाद कर दिया गया।
औरंगजेब ने मथुरा के केशवदेव राय मंदिर से नक्काशीदार जालियों को जोकि उसके बड़े भाई दारा शिकोह द्वारा भेंट की गयी थी को तोड़ने का हुक्म यह कहते हुए दिया कि किसी भी मुसलमान के लिए एक मंदिर की तरफ देखने तक की मनाही है। और दारा शिको ने जो किया वह एक मुसलमान के लिए नाजायज है।
केशवदेव राय मंदिर को रमजान के महिने मे गिरवाया गया और मूर्तियो को बेगम मस्जिद (जामा मस्जिद) के नीचे दफन किया गया
मंदिर गिराने के बाद उसी स्थान पर ईदगाह मस्जिद का निर्माण करवाया
500 ईस्वी पूर्व औरंगजेब द्वारा ध्वस्त किया गया ऐतिहासिक कृष्णजन्मभूमि के केशवदेव राय मंदिर की रुद्रा मूर्ति, जो वर्तमान में मथुरा संग्रहालय में है।
5- कालकाजी मंदिर
12 सितम्बर 1667 को औरंगजेब के आदेश पर दिल्ली के प्रसिद्द कालकाजी मंदिर को तोड़ दिया गया।
25 मई 1679 को जोधपुर से लूटकर लाई गयी मूर्तियों के बारे में औरंगजेब ने हुकुम दिया कि सोने-चाँदी-हीरे से सज्जित मूर्तियों को जिलालखाना में सुसज्जित कर दिया जाये और बाकि मूर्तियों को जामा मस्जिद की सीढियों में गाड़ दिया जाये।
6- श्रीनाथ जी मंदिर की मूर्ति का स्थानांतरण
5 दिसम्बर 1671 औरंगजेब के शरीया को लागु करने के फरमान से गोवर्धन स्थित श्री नाथ जी की मूर्ति को पंडित लोग मेवाड़ राजस्थान के सिहाद गाँव ले गए। जहाँ के राणा जी ने उन्हें आश्वासन दिया की औरंगजेब की इस मूर्ति तक पहुँचने से पहले एक लाख वीर राजपूत योद्धाओं को मरना पड़ेगा।
6दिसम्बर को उदयपुर मे बने जगन्नाथ मंदिर को राजपूतो द्वारा बचाया गया 23 दिसम्बर 1679 को औरंगजेब के हुक्म से उदयपुर के महाराणा झील के किनारे बनाये गए मंदिरों को तोड़ा गया। महाराणा के महल के सामने बने जगन्नाथ के मंदिर को मुट्ठी भर वीर राजपूत सिपाहियों ने अपनी बहादुरी से बचा लिया।
7. 22 फरवरी 1980 को औरंगजेब ने चित्तोड़ पर आक्रमण कर महाराणा कुम्भा द्वाराबनाएँ गए 63 मंदिरों को तोड़ डाला।
8. जगन्नाथ मंदिर
1 जून 1681 को औरंगजेब ने प्रसिद्द पूरी के जगन्नाथ मंदिर को तोड़ने का हुकुम दिया।
9. 13 अक्टूबर 1681 को बुरहानपुर में स्थित मंदिर को मस्जिद बनाने का हुकुम औरंगजेब द्वारा दिया गया।
10. नन्द माधव मंदिर
13 सितम्बर 1682 को मथुरा के नन्द माधव मंदिर को तोड़ने का हुकुम औरंगजेब द्वारा दिया गया। इस प्रकार अनेक फरमान औरंगजेब द्वारा हिन्दू मंदिरों को तोड़ने के लिए जारी किये गए।
और यहाँ भी मंदिर तोड़कर उसी स्थान पर मस्जिद बनवाई जिसका नाम था आलमगिर मस्जिद
23 दिसम्बर 1679 को सिर्फ उदयपुर में 172 मंदिर ध्वस्त करने का औरंगजेब द्वारा पारित आदेश
हिन्दुओं पर औरंगजेब द्वारा अत्याचार करना
2 अप्रैल 1679 को औरंगजेब द्वारा हिन्दुओं पर जजिया कर लगाया गया
जिसका हिन्दुओं ने दिल्ली में बड़े पैमाने पर शांतिपूर्वक विरोध किया परन्तु उसे बेरहमी से कुचल दिया गया।
इसके साथ-साथ मुसलमानों को करों में छूट दे दी गयी जिससे हिन्दू अपनी निर्धनता और कर न चूका पाने की दशा में इस्लाम ग्रहण कर ले।
16 अप्रैल 1667 को औरंगजेब ने दिवाली के अवसर पर आतिशबाजी चलाने से और त्यौहार बनाने से मना कर दिया गया।
धर्मांतरण
इसके बाद सभी सरकारी नौकरियों से हिन्दू कर्मचारियों को निकाल कर उनके स्थान पर मुस्लिम कर्मचारियों की भरती का फरमान भी जारी कर दिया गया।
हिन्दुओं को शीतला माता, पीर प्रभु आदि के मेलों में इकठ्ठा न होने का हुकुम दिया गया।
हिन्दुओं को पालकी, हाथी, घोड़े की सवारी की मनाई कर दी गयी।
कोई हिन्दू अगर इस्लाम ग्रहण करता तो उसे कानूनगो बनाया जाता।
7 अप्रैल 1685 हिंदुओं का धर्मान्तरण करने के लिए औरंगजेब द्वारा जारी किया गया फतवा मुसलमान बनने पर प्रत्येक हिन्दू पुरुष को 4 रु जबकि हिंदू महिला को 2 रु दिये जाने का आदेश दिया था ।
ऐसे न किए जाने पर न जाने कितने अत्याचार औरंगजेब ने हिन्दू जनता पर किये और आज उसी द्वारा जबरन मुस्लिम बनाये गए लोगों के वंशज उसका गुण गान करते नहीं थकते हैं।
13 अक्टूबर 1666 औरंगजेब के अनुसार एक मुसलमान का एक मंदिर या मूर्ति को देखने भी एक पाप है।
16 फरवरी 1668 को औरंगजेब ने संगीत पर प्रतिबंध लगा दिया,
मगर इन सबका परिणाम वही निकला जो हर अत्याचारी का निकलता हैं। बर्बादी। औरंगज़ेब को उसके कुकर्मों, उसके बाप के शाप, उसके भाइयों की हाय, गैर मुसलमानों के प्रति वैमनस्य की भावना और मज़हबी उन्माद ने बर्बाद कर दिया।
जयतु जयतु हिन्दूराष्ट्रम् 🚩
जयतु संस्कृतम् जयतु भारतम् 🚩
0 Comments