" पानीपत की रक्त संक्रांति "


एक संक्रांति वह भी थी .... सन 1761 तारीख़ 14 जनवरी.... 
 
(मूल फ़ारसी में उपलब्ध दस्तावेज़ों में दर्ज है)

पानीपत की तीसरी लड़ाई... अहमद शाह दुर्रानी (अब्दाली) और सदाशिव राव भाऊ की सेनाओं के बीच.. 

एक ऐसी लड़ाई जो मराठा सेना जीतते जीतते हार गई, और अब्दाली क़िस्मत से जीत गया.... 

खुद उसने भी नहीं सोचा था ... 

और ये इतिहास में दर्ज है .... 

पानीपत के युद्ध के बाद खुद अहमदशाह अब्दाली के शब्दों में अंकित है

‘देखते ही देखते शेर की तरह शूर और शक्तिशाली सैनिक एक दूसरे पर बिजली की माफ़िक़ टूट पड़े। ऐसा शौर्य पहले कभी देखने में नहीं आया। रुस्तम और इसफ़िंदर जैसे वीरों ने भी अगर ये युद्ध देखा होता तो उन्होंने आश्चर्य से अपनी उँगलियाँ चबा ली होतीं। हमारे दुश्मन (मराठा सेना) ने ग़ज़ब का युद्ध किया और ऐसा पराक्रम दिखाया कि कोई और ऐसा कर ही नहीं सकता था। शूर और क्रूर शत्रु (मराठों) ने युद्ध में कोई कसर नहीं छोड़ी पर अल्लाह का करम मुझ पर था और अचानक फ़तह की हवाएँ मेरे माफ़िक़ बहने लगीं’

.... और इस युद्ध के बाद अहमदशाह अब्दाली ने नानासाहब पेशवा को पत्र लिख कर अपनी सफ़ाई पेश की और मराठों से मित्रता की उत्कट इच्छुक प्रकट की - 

‘हमारी और आपकी दुश्मनी होने की कोई वजह नहीं. आपके पुत्र विश्वासराव और भाई भाऊसाहेब की युद्ध में हुई मृत्यु हमारी मजबूरी थी। खुद भाऊसाहेब युद्ध के लिए तत्पर हुए तो बचाव के लिए हमें लड़ना ज़रूरी हो गया फिर भी उनकी मौत का हमें बेहद अफ़सोस है। आप दिल्ली की व्यवस्था पहले की तरह चलाते रहें, हमें उसमें कोई ऐतराज नहीं है। केवल सतलज तक का पंजाब प्रदेश आप ख़ुशी से हमारे निज़ाम में रहने दें, शाह आलम को बादशाह रहने दें, और जो हुआ उसे भुलाकर आगे हमारे आपके बीच मोहब्बत हमेशा बनी रहे ऐसी हमारी दिली तमन्ना है जिसे आप पूरा करें’

तो पानीपत की ये तीसरी लड़ाई अब्दाली जीत कर भी हार गया .... 

उसने वापस अफ़ग़ानिस्तान का रुख़ किया और फिर कभी हिंदुस्तान की तरफ़ नहीं आया .... 

एक साल के अंदर ही मराठों ने उत्तर भारत में फिर अपना निज़ाम क़ायम किया... 

अब्दाली को हिंदुस्तान में लाने वाले नजीब खान रोहिला का नामोनिशान महादजी सिंधिया ने ख़त्म किया ...

होलकर और सिंधिया की सेनाओं ने दिल्ली पर अपना प्रभुत्व स्थापित किया... 

1772 से दिल्ली के लाल क़िले पर मराठों का झण्डा फहराने लगा और सन 1803 तक फहराता रहा।

जयतु जयतु हिन्दूराष्ट्रम् 🚩

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