जगद्गुरु रामानुजाचार्य



जगद्गुरु श्री रामानुजाचार्य जिनका भौतिक शरीर विगत 887 सालों से संरक्षित रखा जा रहा है

पूरी दुनिया के लोग मिस्र की राजाओं के मृत शरीर (ममी)  संरक्षित शरीर को देख हैरान हैं। बहुत कम लोगों को इस बात की जानकारी है कि मिस्र के राजाओं के मृत शरीर, जिस वस्त्र में लपेटे जाते थे। वे मसलिन भारतवर्ष से ही आयातित थे। 

तमिलनाडु के जिला तिरुचिरापल्ली के श्रीरंगम स्थित "श्रीरंगनाथस्वामी मंदिर", जिसे भारत के सबसे बड़े मंदिर-परिसर का गौरव प्राप्त है, में विशिष्टाद्वैतदर्शन के महान आचार्य और श्रीवैष्णव परंपरा के अग्रणी संत स्वामी रामानुजाचार्य (1017-1137) का पद्मासनस्थ भौतिक शरीर विगत 887 सालों से संरक्षित रखा जा रहा है और यहां देखा जा सकता है।

श्रीरंगनाथस्वामी मंदिर के पांचवें परिक्रमा-पथ पर स्थित "श्री रामानुज मंदिर" के दक्षिण-पश्चिम कोने पर यह भौतिक शरीर संरक्षित है। 

रामानुजाचार्य 120 वर्ष तक जीवित रहे थे। 

1137 में उन्होंने पद्मासन अवस्था में ही समाधि ले ली थी।

स्वयं श्रीरंगनाथस्वामी के आदेश से उसी अवस्था में रामानुजाचार्य के शिष्यों ने उनके भौतिक शरीर को संरक्षित रख लिया। इस संरक्षित शरीर में आँखें, नाखून आदि स्पष्ट दिखाई देते हैं। सड़न से बचाने के लिए इस शरीर पर रोजाना किसी प्रकार का अभिषेक नहीं किया जाता।

वर्ष में दो बार जड़ी-बूटियों से इस शरीर को साफ किया जाता है और उस समय भौतिक शरीर पर चंदन और केसर का आलेपन किया जाता है।

हाँ इस पवित्र स्थान का गोवा या मिस्र जैसा कोई प्रचार नहीं किया जाता लेकिन आशा है आप शेयर कर इसे सभी तक पहुँचा ही देंगे.. 

जय वैदिक सनातन धर्मस्य 🔱 🏹 🪈 🚩

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