👁️❗👁️
सनातन धर्म संस्कृति मानता है कि ध्वनि और शुद्ध प्रकाश से ही ब्रह्मांड की रचना हुई है! आत्मा इस जगत का कारण है!
सनातन धर्म में कुछ ध्वनियों को पवित्र और रहस्यमयी माना गया है, जैसे मन्दिर की घंटी, शंख, बांसुरी, वीणा, मंजीरा, करतल, पुंगी या बीन, ढोल, नगाड़ा, मृदंग, चिमटा, तुनतुना, घाटम, दोतार, तबला और डमरू!
डमरू या डुगडुगी एक छोटा संगीत वाद्य यंत्र होता है! डमरू को हिन्दू, तिब्बती और बौद्ध धर्म में बहुत महत्व दिया गया है! भगवान शंकर के हाथों में डमरू को दर्शाया गया है! साधु और मदारियों के पास अक्सर डमरू मिल जाएगा!
शंकु आकार के बने इस ढोल के बीच के तंग हिस्से में एक रस्सी बंधी होती है जिसके पहले और दूसरे सिरे में पत्थर या कांसे का एक-एक टुकड़ा लगाया जाता है!
जब डमरू को मध्य से पकड़ कर हिलाया जाता है तो यह डला (टुकड़ा) पहले एक मुख की खाल पर प्रहार करता है और फिर उलट कर दूसरे मुख पर, जिससे 'डुग-डुग' की आवाज उत्पन्न होती है, इसीलिए इसे डुगडुगी भी कहते हैं!
डमरू की 14 आवाजें:- वेबदुनिया की रिसर्च अनुसार जब डमरू बजता है तो उसमें से 14 प्रकार की ध्वनि निकलती हैं! पुराणों में इसे मंत्र माना गया!
यह ध्वनि इस प्रकार है:- 'अइउण्, त्रृलृक, एओड्, ऐऔच, हयवरट्, लण्, ञमडणनम्, भ्रझभञ, घढधश्, जबगडदश्, खफछठथ, चटतव, कपय्, शषसर, हल् ! उक्त आवाजों में सृजन और विध्वंस दोनों के ही स्वर छिपे हुए हैं! यही स्वर व्याकरण की रचना के सूत्र धार भी है! सद्ग्रन्थों की रचना भी इन्ही सूत्रों के आधार पर हुई!
डमरू बजने का लाभ:- पुराणानुसार भगवान शिव नटराज के डमरू से कुछ अचूक और चमत्कारी मंत्र निकले थे! कहते हैं कि यह मंत्र कई बीमारियों का इलाज कर सकते हैं! कोई भी कठिन कार्य हो शीघ्र सिद्धि प्राप्त होती है! उक्त मंत्र या सूत्रों के सिद्ध होने के बाद जपने से सर्प, बिच्छू के काटे का जहर उतर जाता है! ऊपरी बाधा हट जाती है! माना जाता है कि इससे ज्वर, सन्निपात आदि को भी उतारा जा सकता है!
रहस्य- डमरू की ध्वनि जैसी ही ध्वनि हमारे अन्दर भी बजती रहती है, जिसे अ, उ और म या ओम् कहते हैं! हृदय की धड़कन व ब्रह्माण्ड की आवाज में भी डमरू के स्वर मिश्रित हैं!
डमरू की आवाज लय में सुनते रहने से मस्तिष्क को शांति मिलती है और हर तरह का तनाव हट जाता है! इसकी आवाज से आस पास की नकारात्मक ऊर्जा व शक्तियों का पलायन हो जाता है!
डमरू भगवान शिव का वाद्ययंत्र ही नहीं यह बहुत कुछ है! इसे बजाकर भूकम्प लाया जा सकता है व बादलों में भरा पानी भी बरसाया जा सकता है! डमरू की आवाज यदि लगातर एक जैसी बजती रहे तो इससे चारों ओर का वातावरण बदल जाता है!
यह बहुत भयानक भी हो सकता है और और सुखदायी भी! डमरू के भयानक आवाज से लोगों के हृदय भी फट सकते हैं! कहते हैं कि भगवान शंकर इसे बजाकर प्रलय भी ला सकते हैं! यह बहुत ही प्रलयंकारी आवाज सिद्ध हो सकती है! डमरू की आवाज में अनेक गुप्त रहस्य छिपे हुए हैं! महादेव की पूजार्चना में डमरु की ध्वनि का विशेष महत्त्व हैं!
महादेव के डमरू से निकले हुए 14 स्वर "महेश्वर सूत्र" के नाम से जाने जाते हैं, जिन्हें महर्षि पाणिनि ने सूत्रों के रूप में हमारे समक्ष प्रस्तुत किया।
जो संस्कृत भाषा का व्याकरण भी है। इन्हें मंत्रों की तरह भी प्रयोग किया जाता है।
ये स्वर (सूत्र) हैं -
'अइउण्, त्रृलृक, एओड्, ऐऔच, हयवरट्, लण्, ञमड.णनम्, भ्रझभञ, घढधश्, जबगडदश्, खफछठथ, चटतव, कपय्, शषसर, हल्।
इनके उपयोग से अनेक उपचार भी संभव हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं -
1. बिच्छू के काटने पर इन सूत्रों से झाड़ने पर विष उतर जाता है।
2. सर्प के काटने पर जिस व्यक्ति को सर्प ने काटा हो उसके कान में उच्च स्वर से इन सूत्रों का पाठ सुनाने से विष निष्क्रिय हो जाता है।
3. ऊपरी बाधा का आवेश जिस व्यक्ति पर आया हो उस पर इन सूत्रों से अभिमन्त्रित जल के छिड़काव से ऊपरी बाधा का आवेश भी छूट जाता है।
4. इन सूत्रों को भोज पत्र पर लिखकर गले में बांधने से अथवा हाथ पर बांधने से प्रेत बाधा भी नष्ट हो जाती है।
5. ज्वर, तिजारी, सन्निपात, अथवा चौथिया आदि होने पर इन सूत्रों द्वारा झाड़ने फूंकने से ज्वर शीघ्र ही छूट जाता है।
6. इन्हें पीपल के एक बड़े पत्ते पर लिखकर गले या हाथ पर बांधने से भी ज्वर छूट आराम मिलता है।
7. उन्माद या मिर्गी आदि रोग से पीड़ित होने पर इन सूत्रों से झाड़ा करना चाहिए तथा प्रतिदिन जल को अभिमन्त्रित करके रोगी को पिलाना चाहिए।
8. सफेद चंदन से अनार की कलम के द्वारा भोजपत्र पर लिखकर कवच के रूप में भी बांधा जा सकता है, इससे सभी प्रकार का दृष्टिदोष दूर होता है।
विशेष- किंतु, इनका जप एक श्वास में करने का अभ्यास होना चाहिए। ये ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
यदि कोई व्यक्ति, महाशिवरात्रि, प्रदोष व्रत/काल अथवा श्रावण मास में इनका निरंतर अभ्यास और पाठ करता है, तो शीघ्र ही सिद्ध प्राप्त कर सकता है, जिससे अभीष्ट की प्राप्ति भी संभव है।
नमः पार्वती पतये हर हर महादेव 🔱 🚩

0 Comments