राजा छत्रसाल चम्पतराय बुंदेला के पुत्र थे महावीर थे उन्होंने राजपूतों की विशाल सेना बनाई थी उनके परम् मित्र मिर्जा राजा जय सिंह और चम्पतराय दोनों महावीरों ने औरंगजेब को दिल्ली की तख्त पर सत्तासीन करने में बड़ा योगदान दिया पर कुछ दिनों बाद चम्पतराय उसकी आँखों मे खटकने लगे और औरंगजेब ने आक्रमण कर दिया चम्पतराय की पत्नी राजकंवर राजा छत्रसाल की माता को जौहर करना पड़ा ।
उस समय राजा छत्रसाल की आयु बहुत कम थी कम आयु के कारण या अनभिज्ञता में अपने पिता की ही तरह वो औरंगजेब की सेवा करते रहे पर महाराज छत्रसाल का रक्त बारबार उबाल मार रहा था और वो शिवाजी महाराज के पराक्रम से प्रभावित होकर शिवाजी महाराज के साथ आ गए ।
शिवाजीराजे ने उनको कहा कि आप परमवीर चम्पतराय बुंदेला के पुत्र है अपनी भूमि को तुर्को से आजाद करवाये मात्र 22 वर्ष की उम्र में राजा छत्रसाल ने मुगलों के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया
बुंदेलखंड , चित्रकूट, पन्ना, पश्चिम में ग्वालियर उत्तर में कालपी और दक्षिण में दमोह तक बुंदेलखंड के मजबूत शासक बन गए
वृद्ध राजा छत्रसाल 1727 में जब वह अपनी वृद्धावस्था में पहुंचकर बडे़ बेटे हृदयशाह व छोटे जगतराज को पन्ना और जैतपुर की जागीर देकर ईश्वर भक्ति में तल्लीन थे।
उधर बाजीराव मध्यप्रदेश की मुहिम पर थे गढ़मण्डला नामक स्थान पर बाजीराजे का शिविर लगा था पालखेड का युद्ध जीतकर मालवा की ओर कूच किया था।
राजा छत्रसाल ने दिल्ली पर चढ़ाई की मुहिम पर बढ़े पर दिल्ली के सुल्तान ने बंगश खान को भेज दिया और राजा छत्रसाल को दिल्ली की मुहिम से पीछे हटना पड़ा वे वहाँ से जैतपुर के किले पर पहुँचे थे तभी छोटे बेटे जगतराज की राजधानी जैतपुर पर इलाहाबाद के जागीरदार बंगश खां ने आक्रमण कर कब्जा कर लिया।
वही राजा छत्रसाल जो शिवाजी महाराज के शिष्य थे जिन्होंने मुगलों की ईंट से ईंट बजा दी ।
वृद्ध शेर को ये समाचार मिलते ही मुट्ठी भींच ली तलवार कस ली और दहाड़ उठे मेरे क्षत्रिय वीरों रणभूमि से माँ रणचण्डी का संदेशा आ गया आओ शाका कर जाते है बांध लो केसरिया बाना
पर वृद्ध सिंह पर वृद्धावस्था का जोर था शरीर साथ नही दे रहा था पर हौसले युवा थे आंखों में नमी थी ऐसे समय मे राजपुरोहित ने याद दिलाया महाराज आपके मित्र पेशवा बालाजी विश्वनाथ का पुत्र बाजीराव आज पेशवा हैं युद्धवीर हैं उसकी वीरता के चर्चे हैं उसे सहायतार्थ संदेशा भेजे ।
महल में चिताएं सज रही थी क्षत्राणियां कुमकुम तिलक सजा रही थी जौहर की अग्निकुंड में अपने शरीर को समिधा मानकर अर्पित कर दे इस भावना के साथ राजा जी से आखिर भेंट के लिए संदेश भी आ गया ।
राजा छत्रसाल ने संदेश लिखा ।
जो गति भई गजेंद्र की, वही गति हमरी आज
बाजी जात बुंदेल की, बाजी रखियो लाज...
गोधूलि की बेला हो गयी थी ठंडी हवाएं चल रही थी महान बाजीराव के शिविर पर जरीपटका का झंडा फरफर उड़ रहा था छावनी में जहाँ तहा अंगीठिया सुलगाकर भोजन बनाया जा रहा था पालखेड अजमेर की मुहिम से सेना लौटी थी घायल सैनिक पत्तिया बांधे उबटन लगाए तम्बुओं में पड़े थे बाजीराव तकिये पर लेटे थे कुछ हरारत महसूस हो रही थी फिर भी चेहरे पर तरुणाई और जीत का उल्लास था तभी सेवक ने भोजन का आग्रह किया वन्दन के बाद ज्योही निवाला उठाया...
पन्त ने आकर कहा मुजरा स्वीकारा हो
श्रीमंत
राऊ बुंदेलखंड से खलीता आया बंगस ने डेरा डाल दिया हैं राजा जी ने मदद मांगी हैं ।
बाजीराव बिजली की भांति कड़क हो उठे बोले पन्त मुहिम की तैयारी करो हम बुंदेलखंड जाएंगे ।
पन्त ने कहा श्रीमन्त हम अभी एक मुहिम से आये है भोजन तो कर ले ।
बाजीराव ने कहा कि एक हिन्दू राजा ने एक हिन्दू सेनापति से मदद मांगी हैं आज मैं भोजन करता रहा तो इतिहास लिखेगा की एक राजपूत राजा संकट में था तब एक ब्राह्मण भोजन करता रहा
चलो पन्त
निर्देश देते हुए कुछ सैनिकों को लेकर तुरंत निकल गये कि जितनी जल्दी हो पूरी सेना पीछे से आ जाये...
10 दिन का सफर बाजी राव ने छत्रसाल के लिए अपने बहादुर सैनिको के साथ 3 दिन में पूरा किया था रास्ते मे थोड़ी देर के लिए सेना घोड़े की पीठ पर पीठ लगाकर खड़े खड़े ही भोजन करने लगी राऊ भी भूख से मचल रहे थे पंत से कहा पंत भोजन की व्यवस्था करिये पंत ने कहा आटा तो है राऊ पर आग नही..!
वही थोड़ी दूर चिता जल रही थी महान बाजीराव ने कहा जाकर रोटी सेंक लाओ पंत पवित्र आग जल रही हैं पंत ने उसी चिता पर रोटियां सेंकी और राऊ ने घोड़े की पीठ पर बैठे ही बैठे रोटियां खाकर पानी पिया और चल पड़े ।।
उधर राजपूत और मुगल फौज युद्ध को सज्ज थी मुट्ठी भर सेना को देखकर बंगश को विश्वास था कि विजय उसकी हो चुकी है राजा छत्रसाल और उनकी सेना बाजीराजे के इंतजार में थी परंतु कही दूर तक पेशवा सेना दिख न रही थी
पर दूर से ही धूल के साथ हुजूरात सेना के घोड़ो की टॉप आवाज पास आने लगी राजा छत्रसाल और बुंदेला सेना जय भवानी के उद्घोष के साथ प्रसन्न हो उठी ।
बाजीराजे युद्धवेश में थे माथे पर भवानी तिलक माँ रणचंडी के सदृश प्रतीत हो रहा था उनके साथ हुजूरात कि कालजयी सेना मानो यमदूत की तरह हुंकार भर रही थी ।
चौथे दिन मुगल और मराठे घमासान में उलझ गए घोड़े से घोड़ा भिड़ गया कइयो के सर धड़ से दूर जा गिरे
महाभयंकर रणक्रंदन मच गया ऐसा घमासान की ऊंट सहमकर दूर भागने लगे संहाग और गरनाले तोपे खून माटी की कीचड़ में धंस गए बाजीराव की तलवार और दण्डपटका ने तो सर काटने का उच्चाक स्थापित किया था।
सारी रणभूमि मानो काली आंधी में तब्दील हो गयी थी और मृत्यु मनमाना नृत्य कर रही थी मुर्दे में घोड़े का पैर घुटनो भर घुस जाता और खून की पिचकारिया चल उठती ऐसा ही तुमुल रणक्रंदन भीषण घमासान तूफानी मारकाट बेभान चल रहा था
मराठो की सपसपाती तलवार मुगलो के नरमुंडों का ढेर लगा रही थी बाजीराव का दण्डपटका युद्ध की देवी रणचंडी की जिव्हा की भांति रक्तपान कर रही थी।
बाजीराव की तलवार मुगलो को कंठस्नान करा रही थी
तभी राऊ की नजर बंगस पर पड़ी बाजीराव ने जोर से कहा पन्त कांधा दो पन्त के साथ मल्हारराव ने भी कांधा दिया सिंह शावक बाजीराव ने कंधो के सहारे ही सदृश मानो युद्ध की समुद्र में कही से ज्वार भाटा आया हो जैसे उफनता जलप्रवाह बडी बडी अट्टालिकाओं को धूल धूसरित कर देता हैं सदृश वैसे ही राऊ बंगस के हौदे में चढ़ बैठे और अपनी मराठा घोप तलवार से बंगस को कण्ठस्न्नान करा दिया
बाजीराव मराठो के राऊ युद्ध जीत गए।
तभी यह समाचार राजा छत्रसाल को मिला और जौहर कक्ष से क्षत्राणियां ड्योढ़ी तक आ गयी जय भवानी के उद्घोष से सारा महल और बुंदेलखंड गुंजायमान हो उठा तब
राजा छत्रसाल ने बाजीराव को गले लगाकर कहा
"जग में उपजे दो ब्राह्मण एक बाजी एक परशुराम
एक डाही सहस्रार्जुन एक डाही तुरकाव। "
आप मेरे तीसरे पुत्र हैं श्रीमंत ये कहकर राजा जी ने उत्सव की तैयारी की घोषणा की ।।
बंगश की मदद को आ रही दिल्ली की फौज को बीच रास्ते मे ही हुजूरात कि एक टुकड़ी ने रोक रखा था बंगश के पुत्र को हुजूरात ने मृत्यु के घाट उतार दिया पूरी मुगल फौज बौखला गयी और दिल्ली लौट गई ।
सन 1721 को संधिपत्र पर हस्ताक्षर हुए मुगलों के की वो कभी भी बुंदेलखंड पर आक्रमण नही करेंगे
उसी समय राजा छत्रसाल ने अपनी पुत्री सावित्री बाई जूदेव उर्फ मस्तानी साहिबा से विवाह एवं बुंदेलखंड की एक तिहाई क्षेत्र उपहार स्वरूप स्वीकार करने का अनुरोध किया
राजा छत्रसाल ने कहा कि श्रीमंत आज जो आप ने कर दिखाया वो चमत्कार से कम नही बंगश तो बंदी बना लेता या हम वीरगति को प्राप्त हो जाते बुंदेला साम्रज्य ढह जाता सारी राजपूतानिया जौहर कर जाती इस कल्पना से हम काँप जाते है।
आप मेरे पुत्र है होली का त्योहार आप यही मनाएंगे और मेरा उपहार भी स्वीकार करे श्रीमंत
बाजीराजे ने कहा आपकी खुशी और साम्राज्य हित सर माथे पर ।
जय मां भवानी 🏹🔱🚩
जय शिवराय 🏹 🚩
जयतु जयतु हिन्दूराष्ट्रम् 🚩
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