आदि शक्ति महाकाली 🔱🏹🚩

महाकाली की महिमा 
🌺🌺🌺🌺🌺🌺🔱🏹🚩

शक्ति की देवी आदिशक्ति.. और नवरात्रों में आदिशक्ति के नौ रूपों की पूजा की जाती है.. सातवां रूप है महाकाली का। जिनका नाम सुनते है दुष्ट अपना रास्ता बदल लेते है।

आदिशक्ति..दुर्गा..भवानी..चंडिका..महाकाली..और कालरात्रि.. वैसे तो मां दुर्गा के अनेक रूप है.. लेकिन कालरात्रि सबसे भयानक रूप है। दुर्गा के नौ रुपों में सातवां रुप देवी कालरात्रि का है। इस दिन मां महाकाली की पूजा-अर्चना की जाती है। महाकाली का विकारल रूप के आगे राक्षस भी थर थर कांपते है।

काली का स्वरुप अत्यंत भयानक है.. लेकिन ये सदैव शुभ फल ही देने वाली हैं। इसी वजह से मां का नाम 'शुभंकारी' भी है। 

मां ममता की देवी है। वो अपने भक्तो का हर हाल मे साथ देती है। कोई भी परिस्थिति हो.. लेकिन अपने भक्तों को हमेशा दुष्टों से रक्षा करती है। कहते है जब धरती पर असुरों का हाहाकार मचा हुआ था। उस वक्त मां ने आदिशक्ति का रूप धारण करके दैत्य शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज का विनाश करके देवताओं के प्राणों की रक्षा की थी। 

इसके पीछे कहानी मां की शक्ति का प्रमाण देती है। तीनों लोकों में जब हाहाकार मचा था। तब चिंतित होकर सभी देवतागण ने देवों के देव महादेव के पास गए.. और असुरों की विनाशकारी सेना के बारें बताएं.. जिसे महादेव भी चिंतित हो गए। 

महादेव ने दानवों का विनाश करने के लिए माता पार्वती से कहा.. जिसके बाद मां ने दुर्गा का रूप धारण करके शुंभ-निशुंभ का वध कर दिया. .लेकिन जैसे ही दुर्गा मां ने रक्तबीज को मारा उसके शरीर से निकले रक्त से लाखों रक्तबीज उत्पन्न हो गए। इसे देख जगत जननी ने अपने तेज से कालरात्रि को उत्पन्न किया। 

इसके बाद जब कालरात्रि ने रक्तबीज को मारा तो उसके शरीर से निकलने वाले रक्त को कालरात्रि ने अपने मुख में भर लिया और सबका गला काटते हुए रक्तबीज का वध कर दिया.. लेकिन इसके बाद भी मां का क्रोध शांत नहीं हुआ। 

मां के अंदर इतनी ज्वाला थी कि उन्होनें हवा में खाली खप्पर घुमाया। दहकती ज्वाला को शांत कराने के लिए देवों के देव महादेव मां कदमों में आकर लेट गए। बदले की ज्वाला में मां अपने स्वामी के सीने पर पैर रख देती है। जिसके बाद मां गुस्सा शांत होता.. उन्होंने अहसास होता कि उनके कदमों के नीचे महादेव है..और मां की जिव्हा बाहर निकल आई.. और मां के इसी रूप की पूजा-अर्चना की जाती है।  

मां का रूप जितना विकराल है.. उतना ही मां का हृदय कोमल है। मां के दरबार में जो भी भक्त जाता है। मां उसकी मनोकमानाएं पूर्ण कर उसके जीवन का उद्धार करती है। 

जैसे महाकाली ने महिसासुर का वध करके देवताओं के प्राणों की रक्षा करती थी। वैसे ही मां अपने भक्तों पर आने वाले हर संकट को हर लेती है।

जय मां महाकाली 🔱🏹🚩

Post a Comment

0 Comments