" गांधी और संघ "

1934 में वर्धा में श्री जमनालाल बजाज के यहां जब गांधी जी का निवास था तब पास ही संघ का शीत शिविर चल रहा था। उत्सुकतावश गांधी जी वहां गए, संघ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया और स्वयंसेवकों के साथ उनका वार्तालाप भी हुआ। 

वार्तालाप के दौरान जब उन्हें पता चला कि शिविर में अनुसूचित जाति से भी स्वयंसेवक हैं, और उनसे किसी भी प्रकार का भेदभाव किए बिना सब भाईचारे के साथ स्नेहपूर्वक साथ रहते हैं, सारे कार्यक्रम साथ करते हैं, तब उन्होंने बहुत प्रसन्नता व्यक्त की।

स्वतंत्रता के पश्चात जब गांधी जी का निवास दिल्ली में मैला ढोने वाले समाज की कॉलोनी में था, तब सामने मैदान में संघ की प्रभात शाखा चलती थी। सितम्बर में गांधी जी ने प्रमुख स्वयंसेवकों से बात करने की इच्छा व्यक्त की और सम्बोधित किया-'बरसों पहले मैं वर्धा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक शिविर में गया था। 

उस समय इसके संस्थापक श्री हेडगेवार जीवित थे। स्व. जमनालाल बजाज मुझे शिविर में ले गए थे। मैं उन लोगों का कड़ा अनुशासन, सादगी और छुआछूत की पूर्ण समाप्ति देखकर अत्यंत प्रभावित हुआ था। तब से संघ काफी बढ़ गया है। मैं तो हमेशा से यह मानता हूं कि जो भी संस्था सेवा और आत्म-त्याग के आदर्श से प्रेरित है, उसकी ताकत बढ़ती ही है। लेकिन सच्चे रूप में उपयोगी होने के लिए त्याग भाव के साथ ध्येय की पवित्रता और सच्चे ज्ञान का संयोजन आवश्यक है। ऐसा त्याग, जिसमें इन दो चीजों का अभाव हो, समाज के लिए अनर्थकारी सिद्ध हुआ है।' (यह सम्बोधन 'गांधी समग्र वाड्मय' के खंड 89 में 215-217 पृष्ठ पर प्रकाशित है।)

1921 के असहयोग आंदोलन और 1930 के सविनय अवज्ञा आंदोलन, इन दोनों सत्याग्रहों में डॉक्टर हेडगेवार सहभागी हुए थे। 

इस कारण उन्हें 19 अगस्त 1921 से 12 जुलाई 1922 तक और 21 जुलाई,1930 से 14 फरवरी, 1931 तक, दो बार सश्रम कारावास की सजा भी हुई।

महात्मा गांधी को 18 मार्च, 1922 को छह वर्ष की सजा हुई। तब से उनकी मुक्ति तक प्रत्येक महीने की 18 तारीख 'गांधी दिन' के रूप में मनाई जाती थी। 

1922 के अक्तूबर मास में 'गांधी दिन' के अवसर पर दिए गए भाषण में डॉक्टर हेडगेवार ने कहा कि आज का दिन अत्यंत पवित्र है। महात्मा जी जैसे पुण्यश्लोक पुरुष के जीवन में व्याप्त सद्गुणों के श्रवण एवं चिंतन का यह दिन है। उनके अनुयायी कहलाने में गौरव अनुभव करने वालों के सिर पर तो उनके इन गुणों का अनुकरण करने की जिम्मेदारी विशेषकर है।

जयतु जयतु हिन्दूराष्ट्रम् 🚩

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