"महाराज मुचकन्द"

" महाराज मुचकन्द "
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राजा मुचकुन्द भगवान श्रीरामचंद्र जी के भी पूर्वज थे (रघुकुल), जो त्रेतायुग से द्वापरयुग तक उस गुफा में सो रहे थे।

इन्होंने त्रेतायुग में देवताओ की मदद करने व राक्षसों को पराजित करने के लिए अथक परिश्रम किया था और भगवान से जब तक कोई विघ्न न करे तब तक सोने का ! और...

जो इनको नींद से जगाये उसे भस्म होने का वरदान पाया था।

कहाँ त्रेता में पाया वरदान और कहा द्वापरयुग का कालयवन जिसको वरदान था कि वो किसी यदुवंशी से नही मारा जा सकता, लेकिन भगवान श्री कृष्ण ने इसीलिए कालयवन को लालकार के महाराज मुचकुंद की गुफा में ले आये और अपना पीताम्बर इन्हें ओढा दिया और रणछोड़ भी कहलाये।

लेकिन जब कालयवन को लगा कि भगवान कृष्ण भागकर गुफा में छुपकर सो रहे है तभी उसने महाराज मुचकुंद को जगाया और कालयवन जो किसी यदुवंशी से नही मारा जाता उसे रघुकुल यशचंद्र श्री मुचकुंद के हाथों मरवा दिया। 

भगवान कब किसको कहाँ जरिया बनाते है हम मनुष्यों के समझ के बाहर है।

श्रीकृष्णं वंदे जगद्गुरुम् 🪈 🚩

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