" चिंता और चिंतन "
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भारतीय दर्शन परंपरा में चिंता को चिता तो चिंतन को गंगा के समान बताया गया है!
चिंता में मन बाह्य परिस्थितियों में नकारात्मक रूप से भटक कर हमारा अहित करता है, किंतु चिंतन हमें सकारात्मक विचारों एवं समाधान की दिशा में ले जाकर नकारात्मकता को दूर करता है!
जिस प्रकार से गंगा के पवित्र जल से मन निर्मल एवं पवित्र हो जाता है, उसी प्रकार सार्थक चिंतन से मन एवं बुद्धि शुद्ध हो जाती है!
इससे विकट समस्याओं का भी सहज समाधान दिखने लगता है!
माता सीता की खोज में सुदूर निकल आए वानर दल को जब कुछ नहीं सूझ रहा था तब विवेकशील जामवंत जी ने चिंतन किया उन्होंने हनुमान जी को उनकी शक्तियों का स्मरण कराया!
इससे प्रेरित होकर अपनी शक्तियों की अनुभूति से हनुमान जी ने असंभव से कार्य को संभव बना दिया!
चिंतन द्वारा बड़ी से बड़ी समस्याओं का हल हो सकता है!
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